पाकिस्तानी सांसद ने इस बात को लेकर की सरकार की आलोचना की


इस्लामाबाद। पाकिस्तान के एक वरिष्ठ सांसद ने किसी विदेशी नागरिक को सैन्य अदालत के फैसले पर पुनर्विचार के लिए याचिका दायर करने की अनुमति देने संबंधी अध्यादेश को संसद में पेश नहीं करने को लेकर सरकार की आलोचना की है।

भारतीय नौसेना के सेवानिवृत्त अधिकारी कुलभूषण जाधव की मौत की सजा के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की समय सीमा नजदीक आने के बीच पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेता राजा रब्बानी ने सीनेट में अध्यादेश का यह मुद्दा उठाया। उन्होंने यह मुद्दा उस वक्त उठाया, जब एक मंत्री तीन महीने की देरी के बाद कोविड-19 (जमाखोरी से रोकथाम) अध्यादेश उच्च सदन में पेश करने जा रहे थे।

पाकिस्तान ने 2० मई को ”अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत समीक्षा एवं पुनर्विचार अध्यादेश 2०2०’’ लागू किया था, जिसके तहत किसी सैन्य अदालत के फैसले पर पुनर्विचार के लिए याचिका इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में दायर की जा सकती है। जाधव (5०) को पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने ”जासूसी और आतंकवाद’’ के आरोपों में अप्रैल 2०17 में मौत की सजा सुनाई थी।

हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पिछले साल जुलाई में आदेश दिया था कि पाकिस्तान को जाधव की दोषसिद्धि और सजा की ”प्रभावी रूप से समीक्षा और पुनर्विचार’’ करना चाहिए तथा बिना किसी देरी के राजनयिक संपर्क मुहैया कराना चाहिए। गत सप्ताह पाकिस्तान के अतिरिक्त महान्यायवादी अहमद इरफान ने कहा कि 17 जून 2०2० को जाधव को अपनी सजा और दोषसिद्धि की समीक्षा तथा पुनर्विचार के लिए इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में एक अपील दायर करने की पेशकश की गई।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने भारत सरकार, जाधव या उनके कानूनी प्रतिनिधि को 6० दिनों के भीतर इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में पुनर्विचार याचिका दायर करने की अनुमति देने के लिए 2० मई को एक अध्यादेश जारी किया। इस अध्यादेश की अवधि 19 जुलाई को समाप्त हो जाएगी। रब्बानी ने कहा कि इस अध्यादेश को संसद में पेश करने में देरी के लिए संबंधित मंत्री को स्पष्टीकरण देना चाहिए।

पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षाबलों ने तीन मार्च 2०16 को अशांत बलूचिस्तान प्रांत से जाधव को गिरफ्तार किया था। यह दावा किया गया है कि वह ईरान से पाकिस्तान में प्रवेश किये थे। वहीं, भारत का कहना है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया था, जहां नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद वह कारोबार के सिलसिले में गये थे।





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